ग्लोबल वॉर्मिंग की समस्या से जूझ रही दुनिया, जानिए क्यों पड़ रही भीषण गर्मी
पूरी दुनिया ग्लोबल वॉर्मिंग की समस्या से जूझ रही है और भारत की बात करें तो दुनिया के 100 सबसे गर्म शहरों में 92 भारत के हैं। दिन के साथ ही रातें भी गर्म रहती हैं, जिसे सीवियर वार्म नाइट कहते हैं। इतनी ज्यादा गर्मी क्यों पड़ रही है? पढ़ें इस एक्सप्लेनर में...

Explainer: मैदानी इलाकों में इस बार चुभने वाली गर्मी महसूस हो रही है। सूरज की किरणें इतनी तीखी लग रही हैं जितनी पहले नहीं लगती थीं। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने भी चेतावनी दी है कि इस साल मैदानी इलाकों सहित पहाड़ी इलाकों में भी गर्मी सामान्य से अधिक पड़ेगी। भारतीय मौसम विभाग की मंथली रिपोर्ट देखें तो पता चलता है कि, जलवायु संकट के कारण देश में अब हर मौसम प्रभावित हो रहा है। अप्रैल 2026 के आंकड़ों के अनुसार, भारत में भीषण गर्मी पड़ने वाली है। आंकड़ों के मुताबिक दुनिया के 100 सबसे गर्म शहरों में से 92 भारत के हैं। AQI.in के अनुसार, टॉप के 20 सबसे गर्म स्थानों में से 19 भारत में हैं, जहां तापमान अप्रैल में ही 45°C से ऊपर जा रहा है।
अगले साल और ज्यादा होगी गर्मी
रिपोर्ट्स की मानें तो भारत का 55 प्रतिशत हिस्सा गर्मी के हाई हीट रिस्क जोन में आ चुका है। भारत के अलावा, विश्व के सबसे गर्म देशों की सूची में अक्सर माली, बुर्किना फासो, सेनेगल, कुवैत और इराक जैसे खाड़ी देश शामिल होते हैं, लेकिन वर्तमान में भारत सबसे ज्यादा प्रभावित है। अगर दुनिया की स्थिति पर गौर करें तो पिछले करीब डेढ़ दशक से दुनिया का सामान्य तापमान एक डिग्री सेल्सियस से अधिक रिकॉर्ड किया गया है। 2026 पर गौर करें तो दुनिया में नॉर्मल से 1.44 डिग्री अधिक तापमान बढ़ा है। अगले साल यानी 2027 में गर्मी प्रचंड रूप में पिछले सारे रिकॉर्ड तोड़ देगी।
बढ़ती गर्मी की वजह क्या है
ऐसे में सवाल उठता है कि भारत में इस साल आखिर इतनी गर्मी क्यों पड़ रही है? देश में बढ़ती गर्मी यानी हीट वेव की वजह हीट डोम, कमजोर पश्चिमी विक्षोभ और जलवायु परिवर्तन शामिल हैं। हीट डोम गर्म हवा को जमीन के पास कैद कर रहा है और इसकी वजह से वायुमंडल में उच्च दबाव के कारण एक ‘अदृश्य ढक्कन’ बन गया है, जो गर्म हवा को ऊपर उठने से रोककर जमीन के करीब ही कैद कर रहा है, जिससे तापमान में भारी वृद्धि हो रही है। पृथ्वी के बढ़ते तापमान के कारण हीटवेव की आवृत्ति और तीव्रता बहुत बढ़ गई है।
जलवायु परिवर्तन सबसे बड़ी वजह
इसके कारण शहरों में कंक्रीट की इमारतें और सड़कें दिन भर गर्मी सोखती हैं और रात में छोड़ती हैं, जिससे रातें भी गर्म हो रही हैं। वृक्षों की कमी और गिरते भूजल स्तर के कारण नमी कम हो गई है, जिससे शुष्क गर्मी का प्रभाव बढ़ गया है।साथ ही जलवायु परिवर्तन भी बड़ी वजह है, जिसमें अल नीनो का प्रभाव और शहरों में कंक्रीट के बढ़ते उपयोग (अर्बन हीट आइलैंड) से तापमान के पार जा रहा है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने दिया है और चेतावनी दी है कि अल-नीनो-ला नीना अब जलवायु संकट के साथ मिलकर मौसम पैटर्न में बदलाव ला रहे हैं। NOAA और ECMWF ने कहा कि संभावना है कि जून-अगस्त 2026 में अल-नीनो 62 प्रतिशत ज्यादा बनेगा। फिर यह अगस्त से अक्टूबर तक 80 फीसदी तक बढ़ सकता है।
दिन के साथ ही रातें भी गर्म हो रही हैं
सबसे गर्म शहरों की बात करें तो बिहार का भागलपुर, ओडिशा का तालचेर, पश्चिम बंगाल के आसनसोल में तापमान 44°C से 45°C तक दर्ज किया गया है। एनवायरनमेंट एंड वॉटर (CEEW) की 2025 जिला-स्तरीय रिपोर्ट कहती है कि भारत के 734 जिलों में से 417 जिले यानी आधे से ज्यादा जिले हाई या वेरी हाई हीट रिस्क जोन में हैं।मौसम विभाग ने कई राज्यों में भीषण लू की चेतावनी भी जारी की है। बदलते मौसम पैटर्न के मुताबिक दिन में गर्मी तो रहती ही है, रात में भी गर्मी से राहत नहीं मिल रही है, इसे ‘वार्म नाइट्स’ कहते हैं। जब न्यूनतम तापमान सामान्य से 6.4 डिग्री से ज्यादा हो तो इसे ‘सीवियर वार्म नाइट’ कहा जाता है और यही वजह है कि रातें ज्यादा गर्म हो रही हैं।
हीट वेव से क्या क्या होता है नुकसान
- मेडिकल एक्सपर्ट्स कहते हैं कि दिन में गर्मी पड़ती है तो रात में शरीर ठंडा होकर रिकवर करता है, लेकिन गर्म रातों में यह राहत नहीं मिलती, इससे डिहाइड्रेशन, नींद खराब होना, हाई ब्लड प्रेशर, थकान, चिड़चिड़ापन और हीट-स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है।
- बता दें कि साल 1998-2017 के बीच दुनिया में 1.66 लाख लोगों की मौत हीटवेव से हुई थी। भारत में 2023 में 48,000 हीटस्ट्रोक केस और 159 मौतें दर्ज हुईं।
- CSE रिपोर्ट के मुताबिक, 2030 तक भारत में ग्लोबल वार्मिंग से 5.8 प्रतिशत वर्किंग ऑवर्स गंवाने का अनुमान है।
- 2015-2100 के बीच एक 2025 मॉडलिंग स्टडी के अनुसार, गर्म रातें हर दशक में 10 से 13 दिन बढ़ सकती हैं और कंपाउंड हीटवेव और आम होंगे।
- बढ़ते तापमान के कारण हीट स्ट्रोक और डिहाइड्रेशन के मामले बढ़ रहे हैं।
- दूसरी तरफ अर्थशास्त्री और स्वास्थ्य विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि, यह भीषण गर्मी सिर्फ तापमान ही नहीं बढ़ाएगी बल्कि यह आर्थिक विकास को धीमा करेगी, उत्पादकता घटाएगी और मेडिकल खर्चों को बहुत ज्यादा बढ़ा देगी।




