‘जलियांवाला बाग’ के अमर बलिदानियों को कोटिशः नमन : डॉ. अभिनव कपूर

जनसेवी डॉ. अभिनव कपूर ने कहा- देश की स्वतंत्रता हेतु अपने प्राणों की आहुति देने वाले ‘जलियांवाला बाग’ के अमर बलिदानियों को कोटिशः नमन।

देहरादून। प्रसिद्ध जनसेवी, विख्यात शिक्षक, ज्ञान कलश सोशल वेलफेयर एंड एजुकेशनल सोसाइटी के अध्यक्ष एवं शिक्षा रत्न की उपाधि से सम्मानित डॉ. अभिनव कपूर ने जलियांवाला बाग हत्याकांड की बरसी (स्मृति दिवस) पर अमर बलिदानियों को भावपूर्ण श्रद्धांजलि देते हुए नमन किया।

इस अवसर पर जारी अपने संदेश में जनसेवी डॉ. अभिनव कपूर ने कहा- देश की स्वतंत्रता हेतु अपने प्राणों की आहुति देने वाले ‘जलियांवाला बाग’ के अमर बलिदानियों को कोटिशः नमन। मां भारती के वीर सपूतों का बलिदान स्थल ‘जलियांवाला बाग’ चिरकाल तक हर भारतवासी के हृदय में राष्ट्र सेवा की ज्योति जागृत करता रहेगा।

शिक्षा रत्न डॉ. अभिनव कपूर ने कहा, 13 अप्रैल 1919 को पंजाब के अमृतसर में हुए जलियांवाला बाग हत्याकांड को आज 106 साल पूरे हो गए हैं। बैसाखी के दिन क्रूर अंग्रेजों ने सैकड़ो भारतीयों को गोलियों से भूनकर उनकी निर्मम हत्या कर दी थी। इतिहास के पन्नो में दर्ज अंग्रेजों के अत्याचार की यह घटना भारतीयों को क्रोध, दुख और गर्व से भर देती है। यह घटना इतनी दर्दनाक थी कि आज भी इसके बारे में सुनकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं।

डॉ. अभिनव कपूर ने स्मृति दिवस पर जलियांवाला बाग हत्याकांड का स्मरण करते हुए कहा कि जालियांवाला बाग में रॉलेट एक्ट और सत्यपाल व सैफुद्दीन किचलू की गिरफ्तारी के खिलाफ विरोध करने के लिए एक सभा हो रही थी। इसमें काफी संख्या में लोग पहुंचे थे। अंग्रेज अफसर जनरल डायर ने नहत्थे लोगों पर गोलियां चलवा दी। जान बचाने के लिए निहत्थे लोगों को भागने तक का मौका नहीं मिला। पार्क से बाहर निकलने के लिए एक संकरा सा रास्ता था इसे भी अंग्रेज सिपाहियों ने बंद कर दिया था। 10 मिनट तक बाग को घेरे अंग्रेजों ने चारो तरफ से गोलियां बरसाईं। कुछ लोग तो अपनी जान बचाने के लिए कुंए में कूद गए थे। ब्रिटिश सरकार की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस घटना में 379 लोग मारे गए थे जबकि 1200 से अधिक लोग घायल हुए थे।

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